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पाली में भाजपा का महापौर; सालों पुरानी दोस्ती टूटी:कांग्रेस में फूट का फायदा बीजेपी के पक्ष में गया; पढ़ें- तीसरे नंबर पर कैसे खिसकी
पाली नगर निगम का रिजल्ट चौंकाने वाला रहा। जहां वोटिंग के बाद भाजपा बोर्ड बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी। वहीं कांग्रेस बहुमत के पास में थी। सोमवार को पार्षदों ने पासा पलट दिया और भाजपा ने अपना बोर्ड बना लिया। जहां पहले निर्दलीय राजबाला हिंगड़ के जीतने की संभावना जताई जा रही थीं वहीं परिणाम कुछ और निकला। कांग्रेस की फूट का सीधा फायदा भाजपा को मिला और उनके पक्ष में 33 पार्षदों ने वोटिंग की। कांग्रेस की सुमित्रा जैन को 3 वोट ही मिले वही निर्दलीय राजबाला हिंगड़ 29 वोट हासिल कर सकी। सालों से विधायक भीमराज भाटी और प्रदीप हिंगड़ की जोड़ी रही है। हर जगह दोनों साथ नजर आए हैं। लेकिन सिंबल नहीं मिलने के बाद हिंगड़ की कांग्रेस से बगावत और फिर विधायक के भाई पर हमले के मामले के बाद दोनों के रिश्तों में दरार आ गई। दोनों तरफ से एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी की गई। इसी के साथ कांग्रेस तीसरे नंबर पर आ गई। शुरुआत में 29 पार्षदों के साथ टॉप पर चल रही पार्टी तीसरे पर कैसे खिसकी पढ़िए ये रिपोर्ट... 11 दिसम्बर को पार्षदों के लिए वोटिंग हुई थी। इसके बाद 14 सितंबर को काउंटिंग हुई। इसका फाइनल रिजल्ट था- कयास लगाए गए थे कि अब सत्ता की चाबी निर्दलीयों के हाथ में होगी। जोड़ तोड़ की गणित के साथ दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने बागियों और पार्टी के सिंबल पर जीत कर आए लोगों को जोड़ना शुरू किया। इधर राजबाला हिंगड़ कांग्रेस से बागी हुई तो भाजपा की कुसुम सोनी और पुष्पा सोमनानी ने भी महापौर के लिए नामांकन भर दिया था। नाम वापसी के दिन भाजपा अपने बागियों को मनाने में कामयाब हुई लेकिन कांग्रेस के पास अब भी राजबाला के रूप में बागी सामने थीं। सोमवार को परिणाम आया तो रिजल्ट कुछ ऐसा था- राजबाला हुई थीं बागी महापौर के लिए कांग्रेस की ओर से राजबाला हिंगड़ और सुमित्रा जैन ने नामांकन भरा था। दोनों ने निर्दलीय भी पर्चा भरा था। सिंबल सुमित्रा जैन के नाम का खुला तो राजबाला हिंगड़ के समर्थकों में नाराजगी छा गई। पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ ने आरोप लगाया कि जयपुर से राजबाला के नाम का सिंबल आया। पाली में गड़बड़ी कर सुमित्रा जैन के नाम का सिंबल जमा करवा दिया उनके साथ गलत हुआ। फिर क्या था उन्होंने राजबाला को निर्दलीय महापौर बनाने के लिए मैदान में उतारा और दावा किया की उनके पास आवश्यक बहुमत है। चर्चा राजबाला की, नाम नमिता का आया आज 21 सितंबर को सुबह हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए राकेश भाटी के नेतृत्व में बाड़ेबंदी से 31 पार्षद महापौर के लिए वोट करने के लिए निगम पहुंचे और दावा किया कि उनके पक्ष में 41 पार्षद हैं और राजबाला महापौर बनेगी। कुछ देर बार कांग्रेस की सुमित्रा जैन और भाजपा की नमिता बुबकिया अकेली निगम पहुंची। पूर्व पार्षद भंवर राव 8 पार्षदों के साथ निगम पहुंचे और 3 निर्दलीय पार्षद एक साथ पहुंचे। निर्दलीय कुसुम सोनी सबसे अंत में अकेली पहुंची। जो माहौल चल रहा था उसे देखकर लग रहा था कि महापौर का ताज राजबाला के सिर सजेगा। राजबाला के समर्थकों ने तो जश्न की तैयारी भी कर ली थी। महापौर के चुनाव के बाद जब परिणाम सामने आया तो सब चौक गए। भाजपा की नमिता बुबकिया के पक्ष में 33 पार्षदों ने वोट किया, कांग्रेस की सुमित्रा जैन के पक्ष में 03 और निर्दलीय राजबाला के पक्ष में 29 पार्षदों ने वोट किया। इस तरह भाजपा निगम बोर्ड बनाने में कांग्रेस से पिछड़ी नजर आ रही थी वह फ्रंट पेज पर आई और नमिता का महापौर बनाकर बड़ा उलट फेर करने में कामयाब हुए। क्योंकि कांग्रेस से कई पार्षद ऐसे थे जो नहीं चाहते थे कि राजबाला हिंगड़ सभापति बने उन्होंने क्रॉस वोटिंग की जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला। दूसरी और भाजपा भी कुछ निर्दलियों को बनाकर अपने पक्ष में वोटिंग करवाने में कामयाब रही। कांग्रेस की फूट का फायदा उठाया पाली को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भी पाली से हैं। ऐसे में यहां निगम में कांग्रेस को बोर्ड बनता तो कहीं न कहीं प्रदेश स्तर पर भी पाली की साख कमजोर होती। कांग्रेस की फूट ने भाजपा को संजीवनी देने का काम किया। भाजपा के गढ़ को बचाने के लिए सभी भाजपा नेता एक हो गए और लक्ष्य था पाली में भाजपा का बोर्ड बनाना। ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भी राजधानी छोड़कर पाली के कई दौरे किए। निगम में भाजपा का बोर्ड बने इसलिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख और जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी एक टीम बने और जोड़-तोड़ में और कांग्रेस की फूट का किस तरह फायदा उठाया जा सकता है इसकी रणनीति बनाने में जुट गए। भाजपा नेताओं का कद बढ़ा पाली नगर निगम सहित जिले की सभी 9 नगर पालिकाओं में भाजपा का बोर्ड बना है। कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा। जबकि मारवाड़ जंक्शन, रानी खुर्द नगर पालिका में भी कांग्रेस बोर्ड बना सकती थी लेकिन भाजपा की कूटनीति के आगे कांग्रेस नेताओं की नीति नहीं चली। इस इन जीत का सबसे बड़ा फायदा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को होगा। पाली में पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख और भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी के नेतृत्व में युवाओं की नई टीम ने अच्छी मेहनत की और पाली में भाजपा के गढ़ में कांग्रेस को सेंधमारी करने से रोका। यह जीत भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी और पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख का पाली और प्रदेश स्तर पर पार्टी में कदम बढ़ाने का काम करेगी। सालों पुरानी भाटी-हिंगड़ की जोड़ी टूटी सालों से विधायक भीमराज भाटी और प्रदीप हिंगड़ की जोड़ी रही है। हर जगह दोनों साथ नजर आए हैं। लेकिन सिंबल नहीं मिलने के बाद हिंगड़ की कांग्रेस से बगावत और फिर विधायक के भाई पर हमले के मामले के बाद दोनों के रिश्तों में दरार आ गई। विधायक भाटी सोशल मीडिया से लेकर पार्षदों के घर गए और उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में वोट करने की अपील की। इधर, कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने हिंगड़ को समझाया कि नामांकन वापस ले लो नहीं तो भाजपा शायद जीत जाएंगी। लेकिन वे डटे रहे क्योंकि उनका कहना था कि सिंबल राजबाला के नाम का मुख्यालय से आया था। जिलास्तर पर गड़बड़ी कर सुमित्रा जैन के नाम का सिंबल भरा गया। इसलिए निर्दलीय मैदान में उतरे। लेकिन कांग्रेस की यह फूट ही कांग्रेस को ले डूबी। जिलाध्यक्ष शिशुपालसिंह और हिंगड़, हकीम भाई के बीच रिश्तें में भी खटास साफ देखने को मिली। जो साफ इशारा कर रही थी कि पाली में कांग्रेस एकजुट नहीं है और इनकी यह फूट ही कांग्रेस को नुकसान पहुंचा गई। पढ़ें पूरी खबर... पाली निगम में बीजेपी का बोर्ड, नमिता को 33 वोट:निर्दलीय राजबाला को 29 मत पड़े; कांग्रेस की सुमित्रा को 3; 10 निकायों का पूरा रिजल्ट
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