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'महिलाओं को 50% आरक्षण और कोटे में कोटा मिले':मेरठ में आजाद समाज पार्टी ने प्रदर्शन कर मांगें रखीं, कहा-रिजर्व पदों पर बैकलॉग भर्ती हो
मेरठ में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सामाजिक न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कमिश्नरेट मुख्यालय पर जिला अध्यक्ष चतर सिंह जाटव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि संविधान में समानता का अधिकार है। इसके बावजूद एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, राजनीति और न्यायपालिका में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। पार्टी ने आरक्षण को सामाजिक भेदभाव और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों से जोड़ा। कार्यकर्ताओं ने आरक्षित पदों पर बैकलॉग भर्ती जल्द कराने और एससी, एसटी व ओबीसी की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। 2 तस्वीरें देखिए… देशभर में ‘संपूर्ण भागीदारी आंदोलन’ का ऐलान आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी ने इन्हीं मांगों को लेकर देशभर के जिला मुख्यालयों पर ‘संपूर्ण भागीदारी आंदोलन’ चलाने की बात कही है। मेरठ में भी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। चतर सिंह जाटव ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। उन्होंने दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण में ‘कोटे के अंदर कोटा’ लागू करने की मांग की। स्थानीय निकायों में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग रखी गई। चार मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण बहाल करने की मांग पार्टी ने उत्तर प्रदेश के कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर के चार मेडिकल कॉलेजों में एससी/एसटी छात्रों के लिए खत्म की गई 70 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को कानून बनाकर दोबारा लागू करने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये मेडिकल कॉलेज स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) के बजट से बनाए गए हैं। जाति जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम प्रदर्शनकारियों ने लोकसभा, विधानसभाओं, राज्यसभा और विधान परिषदों में एससी, एसटी और ओबीसी समाज को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की। उन्होंने जाति जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम जोड़ने की मांग भी रखी। पार्टी के मुताबिक, ओबीसी की जनसंख्या का वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से आकलन होना चाहिए। उच्च न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व की मांग प्रदर्शनकारियों ने उच्च न्यायपालिका में एससी, एसटी और ओबीसी का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की। इसके लिए कॉलेजियम व्यवस्था खत्म कर उच्च न्यायिक आयोग गठित करने की मांग रखी गई।
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