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लघु समाचार पत्रों पर शासन की दुर्नीति, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जड़ों को कमजोर करने वाली नीतियों पर पुनर्विचार जरूरी - डॉ. अखिल बंसल
डॉ. अखिल बंसल, जयपुर। भारत में समाचार पत्र केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की चेतना के वाहक हैं। विशेषकर लघु एवं मध्यम समाचार पत्र देश के कस्बों, गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों की आवाज को शासन और समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन पत्रों के संपादक और पत्रकार वर्षों से जनसमस्याओं, स्थानीय मुद्दों और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता देते आए हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसी नीतियां और व्यवस्थागत निर्णय सामने आए हैं, जिनसे छोटे समाचार पत्रों का अस्तित्व गंभीर संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है। यदि सरकार की नीतियों का
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