top
खरखौदा बना 'सुपर सिटी', सिसाना और सिलाना समेत दर्जनों गांव शहरी दायरे में; दिल्ली-सोनीपत से होगा सीधा जुड़ाव
हरियाणा के सोनीपत जिले में स्थित खरखौदा उपमंडल को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के सबसे बड़े और आधुनिक औद्योगिक एवं आवासीय हब के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक युगांतरकारी निर्णय लिया है। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट) द्वारा जारी आधिकारिक गजट अधिसूचना के अनुसार, खरखौदा और उसके आसपास फैले विशाल भूभाग को हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास व विनियमन अधिनियम के तहत औपचारिक रूप से नियंत्रित शहरी क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। इस दूरगामी फैसले का प्राथमिक उद्देश्य भविष्य में इस पूरे बेल्ट को अनियोजित और अवैध निर्माण से बचाना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की मास्टर प्लानिंग के तहत विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा विकसित करना है। सरकार के इस कदम से खरखौदा अब एक सामान्य उप-तहसील या कस्बे के स्तर से ऊपर उठकर दिल्ली और गुरुग्राम की तर्ज पर एक सशक्त 'सुपर सिटी' बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर हो चुका है। दो बड़े पॉकेट्स में बंटा नया महा-शहरी क्षेत्र: जानिए किन गांवों की बदली तकदीर नियोजन की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने पूरे नए शहरी क्षेत्र को दो रणनीतिक हिस्सों यानी पॉकेट-1 और पॉकेट-2 में वर्गीकृत किया है। पॉकेट-1 के अंतर्गत खरखौदा के नजदीकी और प्रमुख कृषि-आवासीय गांवों को शामिल किया गया है, जिनमें सिसाना, सिलाना, सेहरी और खांडा जैसे दर्जनों घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्र आते हैं। इस पॉकेट की भौगोलिक सीमाएं आगे बढ़कर झरोठी और भदाना के आसपास के विस्तृत भू-भाग तक विस्तृत होती हैं। इस हिस्से में खरखौदा नगरपालिका की मौजूदा चारदीवारी के चारों तरफ पांच किलोमीटर की परिधि में पहले से अधिसूचित शहरी दायरे को भी पूरी तरह समाहित कर लिया गया है। यह गलियारा आगे बढ़कर रोहतक जिले की प्रशासनिक सीमा को छूता है, जिससे यह पूरा पॉकेट रोहतक-सोनीपत औद्योगिक कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा। पॉकेट-2 का विस्तार: सोनीपत नगर निगम से लेकर देश की राजधानी दिल्ली की सीमा तक जुड़ाव परियोजना का दूसरा प्रमुख हिस्सा यानी पॉकेट-2 क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। इस पॉकेट में खांडा, झरोठी और भदाना के बाहरी राजस्व क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिसकी सीधी सीमा आगे चलकर सोनीपत नगर निगम के पांच किलोमीटर के प्रभाव क्षेत्र से सीधे जुड़ती है। इसके बाद यह योजनाबद्ध शहरी गलियारा सोनीपत शहर और कुंडली के औद्योगिक क्षेत्र से होते हुए सीधा दिल्ली के नरेला और बवाना बॉर्डर तक पहुंचता है। इतना ही नहीं, दिल्ली सीमा से आगे इसका भौगोलिक संजाल झज्जर और रोहतक जिलों की सीमाओं के साथ प्राकृतिक रूप से मिल जाता है। इस चतुर्दिक जुड़ाव से खरखौदा अब दिल्ली, सोनीपत, झज्जर और रोहतक के मध्य एक केंद्रीय जंक्शन की भूमिका निभाएगा, जहां से किसी भी दिशा में सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सकेगा। अब नगरपालिका तक सीमित नहीं रहेगा विकास: महा-योजना के तहत बनेगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार द्वारा जारी नई गजट अधिसूचना ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि खरखौदा में भविष्य का शहरी नियोजन केवल पुरानी नगरपालिका की संकीर्ण सीमाओं तक बंधकर नहीं रहेगा। पुराने खरखौदा, सोनीपत और कुंडली के आसपास पांच किलोमीटर की परिधि में पहले से निर्धारित नियंत्रित क्षेत्रों को एक ही सूत्र में पिरोकर एक एकीकृत मास्टर प्लान लागू किया जाएगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि चौड़ी सेक्टर सड़कें, सीवरेज नेटवर्क, डेडिकेटेड स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, 24 घंटे बिजली आपूर्ति, आधुनिक परिवहन टर्मिनल और हरित क्षेत्र (ग्रीन बेल्ट) अब सीधे इन गांवों के राजस्व क्षेत्र से होकर गुजरेंगे। सुनियोजित विकास के माध्यम से इस पूरे क्षेत्र में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स पार्क, तकनीकी संस्थान और आधुनिक आवासीय सोसायटियों की बाढ़ आने की पूरी संभावना बन चुकी है। जमीन के मालिकाना हक को लेकर भ्रम दूर: जानें क्या है असल कानूनी स्थिति ग्रामीणों और स्थानीय किसानों के बीच इस अधिसूचना को लेकर फैले किसी भी संशय को दूर करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी क्षेत्र को शहरी दायरा घोषित करने से जमीन के मालिकाना हक (Ownership Rights) पर कोई कानूनी प्रभाव नहीं पड़ता है। जमीन का राजस्व रिकॉर्ड उसी किसान या भूस्वामी के नाम रहेगा जिसके नाम वह पहले से दर्ज है। हालांकि, जमीन के उपयोग को लेकर कड़े नियम प्रभावी हो चुके हैं। अब इस पूरे अधिसूचित क्षेत्र में बिना विभागीय अनुमति के अवैध कॉलोनियां काटना, अवैध प्लॉटिंग करना या बिना स्वीकृत नक्शे के व्यावसायिक व आवासीय निर्माण करना गैरकानूनी माना जाएगा। कृषि भूमि पर किसी भी प्रकार के गैर-कृषि निर्माण, वेयरहाउस या कॉलोनी निर्माण के लिए नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग से सीएलयू (चेन्ज ऑफ लैंड यूज) और टाउनशिप लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, जिससे आम लोगों को धोखाधड़ी और अनाधिकृत कॉलोनियों के मकड़जाल से सुरक्षा मिलेगी। मारुति सुजुकी का ₹20,000 करोड़ का मेगा प्लांट बना गेम-चेंजर खरखौदा के इस अभूतपूर्व भौगोलिक और प्रशासनिक विस्तार के केंद्र में देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड का विशाल निवेश है। खरखौदा आईएमटी (IMT Kharkhoda) में मारुति और सुजुकी मोटरसाइकिल द्वारा स्थापित किए जा रहे एशिया के सबसे बड़े विनिर्माण संयंत्रों ने इस पूरे इलाके की आर्थिक तकदीर बदल दी है। हजारों करोड़ रुपये के इस निवेश के साथ ही यहां सुजुकी के सैकड़ों वेंडर और ऑटो-कंपोनेंट बनाने वाली वैश्विक कंपनियां अपनी इकाइयां स्थापित कर रही हैं। मारुति प्लांट के पूरी तरह चालू होने पर यहां लाखों कुशल व अकुशल कामगारों, इंजीनियरों और कॉरपोरेट अधिकारियों की आमद होगी। इसी विशाल आबादी की आगामी आवासीय, वाणिज्यिक, चिकित्सीय और मनोरंजक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार ने समय रहते आसपास के दर्जनों गांवों को शहरी दायरे में लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की टाउनशिप का खाका तैयार कर दिया है।
Read full article on Ni News India