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जंतर-मंतर आंदोलन में 20 युवा कोटा से पहुंचे दिल्ली:समता आंदोलन समिति ने दिया समर्थन, बोली- साथ देने वाले को मिलेगा वोट
जातिगत आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे युवा आंदोलन को कोटा से भी समर्थन मिला है। कोटा में भी समता आंदोलन समिति ने आवाज उठाई।समता आंदोलन समिति के नेतृत्व में 20 युवा दिल्ली पहुंचे और आंदोलन के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। समिति की ओर से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शनकारी युवाओं की मांगों पर विचार करने और उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की है। समिति ने कहा कि उनकी मांगों और आंदोलन का समर्थन करने वाले राजनीतिक दल या उम्मीदवार को ही चुनाव में समर्थन दिया जाएगा। युवाओं ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर से जुड़ा विषय है। 18 वर्षों से जातिगत आरक्षण और SC-ST एक्ट से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष समता आंदोलन समिति कोटा के जिलाध्यक्ष गोपाल लाल गर्ग ने बताया कि समिति पिछले 18 वर्षों से जातिगत आरक्षण और SC-ST एक्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर जमीनी और कानूनी स्तर पर संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि समिति की ओर से हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न मामलों को लेकर रिट याचिकाएं दायर की गई है। पदोन्नति में आरक्षण, क्रीमीलेयर और आरक्षण में वर्गीकरण जैसे मुद्दों पर कानूनी लड़ाई लड़ी गई है। जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने कोटा से 20 युवा पहुंचे दिल्ली गर्ग ने बताया कि आरक्षण संबंधी मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में कोटा से भी करीब 20 युवा शामिल होने पहुंचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने तीन बैरिकेड पार किए, लेकिन चौथे बैरिकेड पर पुलिस-प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। समिति ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने देने की मांग की। चुनाव में मुद्दों पर लिखित समर्थन की मांग आगामी चुनावों को लेकर समिति ने राजनीतिक दलों के सामने अपना रुख स्पष्ट किया है। गर्ग ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षा के अनुरूप कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल समिति के एजेंडे का लिखित रूप से समर्थन करेगा और शपथ पत्र देगा, चुनाव में उसी दल को समर्थन और वोट देने पर विचार किया जाएगा। गर्ग ने कहा कि पिछले 18 वर्षों से कानूनी लड़ाई जारी है, लेकिन अब युवा भी अपने भविष्य और अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। समिति ने सरकार से आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है।
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