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इजराइल में सरकार बनाने की चाबी अरब पार्टियों के हाथ? नेतन्याहू बहुमत से 8 सीट दूर
इजराइल में सरकार बनाने की चाबी अरब पार्टियों के हाथ? नेतन्याहू बहुमत से 8 सीट दूर 19 सीटों के साथ किंगमेकर बनने का दावा, विपक्षी गठबंधन भी बहुमत से पीछे; सरकार गठन में मुस्लिम सांसदों की भूमिका पर टिकी निगाहें यरुशलम,एजेंसी। इजराइल में सरकार गठन को लेकर सियासी गणित उलझा हुआ है। दिए गए चुनावी आकलन के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से आठ सीट पीछे है, जबकि विपक्षी नेता आइजेनकोट का गठबंधन 13 सीट पीछे बताया गया है। ऐसे में अरब पार्टियों की भूमिका अहम हो सकती है। इन पार्टियों को 19 सीटें मिलने का अनुमान है, जिससे वे सरकार गठन की बातचीत में निर्णायक बन सकती हैं। इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। हालांकि, उपलब्ध विवरण के अनुसार चुनाव के अंतिम नतीजे 4 नवंबर को घोषित होने हैं। इसलिए अरब पार्टियों की संभावित भूमिका और सरकार गठन का पूरा गणित अंतिम परिणामों तथा गठबंधन वार्ता पर निर्भर करेगा। अरब पार्टियां कैसे बन सकती हैं किंगमेकर? इजराइल में अरब समुदाय की संयुक्त राजनीतिक ताकत इस चुनाव में अहम बनकर उभरी है। शुरुआती मतगणना के आधार पर अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलने की बात सामने आई है। इनमें जॉइंट लिस्ट और रा'आम जैसे दल शामिल हैं। सरकार गठन के तीन संभावित रास्ते सामने हैं: विपक्ष को समर्थन: अरब पार्टियां गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को समर्थन देकर नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने में मदद कर सकती हैं। बाहर से समर्थन: वे मंत्रिमंडल में शामिल हुए बिना किसी विपक्षी सरकार को समर्थन दे सकती हैं या विश्वास मत के दौरान उसकी राह आसान कर सकती हैं। नेतन्याहू के खेमे से समझौता: यदि कुछ अरब सांसद समर्थन देने का फैसला करते हैं, तो सरकार गठन का गणित बदल सकता है। हालांकि, नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर विरोध जताया है। क्या इजराइल में मुस्लिमों का दबदबा बढ़ जाएगा? अरब पार्टियों की बढ़ी हुई सीटों का अर्थ यह नहीं है कि इजराइल में मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। इसका मतलब है कि संसद में उनकी राजनीतिक सौदेबाजी की ताकत बढ़ सकती है। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है और अरब पार्टियों की भूमिका इस आंकड़े तक पहुंचने में निर्णायक हो सकती है। अरब समुदाय के नेता लंबे समय से अपने नागरिक अधिकारों, स्थानीय विकास, सुरक्षा और बजट में उचित हिस्सेदारी जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं। सरकार गठन की बातचीत में इन मांगों को महत्व मिल सकता है। अब आगे क्या होगा? इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग राजनीतिक दलों के नेताओं से विचार-विमर्श कर उस उम्मीदवार को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके बहुमत जुटाने की संभावना सबसे अधिक होगी। उम्मीदवार को पहले 28 दिन मिलेंगे, जिन्हें जरूरत पड़ने पर 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है। यदि सरकार बनाने की कोशिशें नाकाम रहती हैं, तो दूसरे नेता को मौका मिल सकता है और अंततः नए चुनाव की नौबत भी आ सकती है।
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