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Havaldar Vs Jamadar: हवलदार और जमादार में कौन-सा पद था ऊंचा, क्या थीं जिम्मेदारियां और कैसे अलग थे दोनों के काम?
Havaldar Vs Jamadar: सैन्य इतिहास में हवलदार और जमादार ऐसे पद रहे हैं, जिनके नाम आज भी कई लोगों को सुनने को मिलते हैं. हालांकि, दोनों एक ही स्तर के पद नहीं थे. खासकर ब्रिटिश भारतीय सेना और पुरानी भारतीय सैन्य व्यवस्था को समझने के लिए इन दोनों रैंकों के बीच का अंतर जानना दिलचस्प है. पारंपरिक भारतीय सैन्य ढांचे में जमादार, हवलदार से वरिष्ठ पद माना जाता था. ब्रिटिश भारतीय सेना में जमादार भारतीय अधिकारियों की उस श्रेणी में आता था जिसे बाद में जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) व्यवस्था से जोड़ा गया. दूसरी ओर हवलदार एक नॉन कमीशंड ऑफिसर (NCO) रैंक था, जिसे मोटे तौर पर ब्रिटिश सेना के Sergeant के समकक्ष माना जाता था. पुराने सैन्य क्रम में पैदल सेना के लिए जमादार के ऊपर सूबेदार और सूबेदार मेजर जैसे पद आते थे, जबकि हवलदार के ऊपर हवलदार मेजर जैसी वरिष्ठ NCO नियुक्तियां होती थीं. Havaldar की क्या होती थी भूमिका? Havaldar का काम सैनिकों के रोजमर्रा के नेतृत्व और अनुशासन से काफी जुड़ा था. आधुनिक भारतीय सेना के संदर्भ में Havildar एक NCO रैंक है और वह सैनिकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभा सकता है. ऐतिहासिक रूप से Havildar छोटे सैन्य दलों या सेक्शन के नेतृत्व, जवानों की निगरानी और मैदान में जिम्मेदारियां संभालने से जुड़ा रहा है. एक न्यायिक दस्तावेज में भी Havildar को प्लाटून के NCO और जवानों के बीच सीधे संपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका वाला बताया गया है. Jamadar की जिम्मेदारियां क्या थीं? Jamadar की जिम्मेदारी अपेक्षाकृत अधिक नेतृत्व-केंद्रित थी. ब्रिटिश भारतीय सेना में Jamadar को प्लाटून या सैनिकों के समूह की कमान संभालने या वरिष्ठ ब्रिटिश अधिकारी की सहायता करने की जिम्मेदारी दी जा सकती थी. कुछ Jamadar प्रशासनिक नियुक्तियों, जैसे असिस्टेंट क्वार्टरमास्टर या असिस्टेंट एडजुटेंट की भूमिका में भी काम करते थे. यानी आसान भाषा में कहें तो Havaldar मुख्य रूप से सैनिकों के नजदीकी स्तर पर नेतृत्व और निगरानी करता था, जबकि Jamadar को अपेक्षाकृत व्यापक कमान और नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलती थी. ये भी पढ़ें... NEET Success Story: पढ़ाई के घंटे नहीं, इस स्मार्ट स्ट्रेटजी का किया इस्तेमाल, डॉक्टर बनने का सपना हो गया पूराUPPSC Result: यूपीपीएससी ने इस भर्ती परीक्षा का रिजल्ट किया जारी, ऐसे आसानी से करें चेक आज Jamadar नाम क्यों नहीं सुनाई देता? भारतीय सेना में Jamadar नाम का इस्तेमाल 1965 में समाप्त कर दिया गया और इसे पैदल सेना में नायब सूबेदार तथा घुड़सवार/बख्तरबंद इकाइयों में नायब सूबेदार के पदनाम से बदला गया. इसी तरह, आधुनिक सेना की रैंक संरचना में Havildar अभी भी मौजूद है. आधिकारिक रक्षा-संबंधी रैंक समकक्षता में Havildar को Sergeant के बराबर और Naib Subedar को अगले वरिष्ठ स्तर पर रखा गया है. Havaldar vs Jamadar: आसान तुलना पहलू Havaldar Jamadar पारंपरिक स्तर NCO JCO / पुराना VCO स्तर मुख्य भूमिका जवानों का नेतृत्व व निगरानी व्यापक नेतृत्व और कमान वरिष्ठता अपेक्षाकृत कम Havaldar से अधिक आधुनिक स्थिति रैंक अभी भी प्रचलित 1965 के बाद नाम बदला आधुनिक समकक्ष Sergeant Naib Subedar Havaldar और Jamadar में Jamadar का पद ऊंचा था. दोनों की भूमिका सैनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण थी, लेकिन Jamadar को अधिक वरिष्ठ नेतृत्व और कमान की जिम्मेदारियां मिलती थीं. समय के साथ सैन्य ढांचे में बदलाव हुआ और Jamadar का पदनाम Naib Subedar से बदल दिया गया, जबकि Havaldar आज भी भारतीय सेना की महत्वपूर्ण NCO रैंक में शामिल है.
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