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गोरखपुर के छात्र नेताओं को लूट केस में राहत:ABVP ने कराई थी FIR, कोर्ट ने रिमांड अर्जी खारिज की; सतीश की रिहाई का रास्ता साफ
गोरखपुर की कैंट पुलिस को सिविल कोर्ट से झटका लगा। छात्रनेताओं के खिलाफ दर्ज लूट के मुकदमे में पुलिस ने रिमांड मांगी थी। गुरुवार को कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज कर दी। एसडीएफटीसी में हुई सुनवाई के दौरान आरोपी छात्रनेताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज शाही ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने लूट के मामले में रिमांड निरस्त कर दी। इससे मुकदमे में वांछित बनाए गए छात्रनेताओं को राहत मिली है। वहीं, शांतिभंग के मामले में जेल भेजे गए सतीश प्रजापति की रिहाई का रास्ता भी साफ हो गया है। अब जानिए पूरा मामला यूनिवर्सिटी में भिड़ गए दो गुट दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में मंगलवार दोपहर सदस्यता अभियान को लेकर चल रही तकरार के बीच दो छात्र गुट आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों में मारपीट के बाद हंगामा शुरू हो गया। सूचना पर पहुंची कैंट पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले आई। एबीवीपी के विभाग संयोजक प्रशांत त्रिपाठी की तहरीर पर पुलिस ने छात्र नेता सतीश प्रजापति, उज्जवल सिंह, सत्यम समेत अन्य के विरुद्ध मारपीट, लूट और धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने सतीश प्रजापति का शांतिभंग की आशंका में चालान कर जेल भिजवा दिया था। तहरीर देकर लूट का लगाया था आरोप प्रशांत त्रिपाठी की तहरीर के अनुसार मंगलवार को यूनिवर्सिटी परिसर में सतीश प्रजापति, उज्जवल सिंह, सत्यम और उनके साथियों ने उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि इस दौरान बम से उड़ाने की धमकी दी गई। तहरीर में 1068 रुपये और जरूरी दस्तावेज छीनने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति बिगड़ने की सूचना पर कैंट पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर थाने ले आई। इसके बाद बड़ी संख्या में एबीवीपी कार्यकर्ता कैंट थाने पहुंच गए। करीब दो घंटे तक थाने में कार्यकर्ताओं की भीड़ रही। एक सप्ताह से चल रही थी तकरार सदस्यता अभियान को लेकर दोनों पक्षों में करीब एक सप्ताह से तकरार चल रही थी। इस दौरान इंटरनेट मीडिया पर भी एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप किए जा रहे थे। इसी विवाद के बीच मंगलवार को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद के बाद यूनिवर्सिटी और आसपास के क्षेत्र में एहतियात के तौर पर पुलिस फोर्स बढ़ा दी गई। पुलिस इंटरनेट मीडिया पर चल रही पोस्ट और गतिविधियों पर भी नजर रख रही है, ताकि दोबारा विवाद की स्थिति न बने।
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