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चोरी दुकान में हुई और दोषी बना बैंक, व्यापारी को मिला सवा 4 लाख का मुआवजा

📰 Abp News 🕐 1 min read 📅 September 1, 2026 👁 5 views
चोरी दुकान में हुई और दोषी बना बैंक, व्यापारी को मिला सवा 4 लाख का मुआवजा

कई लोग बैंक से लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा लेते हैं, ताकि अपनी जरूरत के काम पूरे कर सके. इसके बदले में लोग अपना कुछ सामान बैंक के पास रखते हैं. अगर आपने भी लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा बैंक से ली हुई है तो यह खबर आपके काम की है. हाल ही में एक ऐसा मामला पुडुचेरी से सामने आया है, यहां पर एक व्यापारी के गोदाम से सामान चोरी हो गया, जिसके बाद कंज्यूमर कंमीशन ने बैंक को 4.15 लाख रुपये से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश दिया. ऐसे में अब जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या था?

क्या है मामला?

दरअसल, ये मामला शांति ट्रेडर्स का है, जो सिंडिकेट बैंक से बैंकिंग सुविधा ले रहा था. व्यापारी बैंक से ओवरड्राफ्ट्र की सुविधा ले रहा था, जिसकी वजह से उसने अपने बिजनेस के स्टॉक को सिक्योरिटी के तौर बैंक के पास रखा था. ध्यान रखें, सिंडिकेट बैंक अब कैनरा बैंक में शामिल हो चुका है.

लाखों के सामान की हुई चोरी

बता दें कि व्यापारी के गोदाम से जुलाई 2001 में लगभग 4.15 लाख रुपये का सामान चोरी हो गया, जिसके बाद चोरी की जानकारी पुलिस और बैंक को दी गई.

इंश्योरेंस का इंतजाम किसने किया?

  • व्यापारी के सामान का इंश्योरेंस भी हुआ था, लेकिन अलग-अलग समय पर पॉलिसी का कवरेज बदलता रहा.
  • सबसे जरूरी बात तो यह है कि व्यापारी के सामान के इंश्योरेंस का इंतजाम बैंक ने ही किया था और साथ ही उसका प्रीमियम भी बैंक भर रहा था.

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आगे क्या हुआ?

इस बीच एक जरूरी बात पता चली कि पहले वाली इंश्योरेंस पॉलिसी में चोरी होने पर नुकसान का कवर था. लेकिन मामला तब हैरान करने वाला हुआ जब पता चला कि चोरी होने के दौरान पॉलिसी में आग लगने से होने वाले नुकसान का कवर था. यानी चोरी का कवर उस समय पॉलिसी में शामिल नहीं था, जिसकी वजह से बैंक ने नुकसान की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया.

पुलिस ने चोरों का लगाया पता?

व्यापारी ने जब चोरी की जानकारी पुलिस को दी, लेकिन चोरों का कुछ पता नहीं चला, जिसके बाद व्यापारी ने दूसरा कदम उठाया. चोरी होने की वजह से व्यापारी का लाखों का नुकसान हो गया था, जिसके बाद उसने इंश्योरेंस कंपनी और बैंक से मुआवजा की मांग की.

कंज्यूमर कमीशन ने क्या कहा?

बता दें कि जिला कंज्यूमर कमीशन ने बैंक को 4,15,612.29 रुपये देने का आदेश दिया. साथ ही कमीशन ने माना की चोरी सच में हुई थी. बैंक का कहना था कि चोरी के इंश्योरेंस की जिम्मेदारी उसकी नहीं थी, इसलिए बैंक इस फैसले से सहमत नहीं था. कंज्यूमर कमीशन ने बैंक की अपील को खारिज करते हुए 4,15,612.29 रुपये पर 9 प्रतिशत का ब्याज देने का निर्देश दिया.

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ओवरड्राफ्ट क्या होता है?

ओवरड्राफ्ट (OD) बैंक की एक सुविधा है, जिसमें ग्राहक अपने अकाउंट से मौजूदा रकम से ज्यादा पैसे निकाल सकता है. यानी अगर बैंक अकाउंट में बैलेंस जीरो है, उसके बाद भी ग्राहक अपने अकाउंट से एक तय लिमिट तक पैसे निकाल सकता है. यानी मानलीजिए अगर आपके अकाउंट में केवल 5 हजार हैं और आपको 20 हजार की जरूरत है तो बैंक आपको 15 हजार रुपये निकालने देगा और इसी को ओवरड्राफ्ट कहते हैं. ध्यान रखें, आप केवल अपने बैंक की तय लिमिट के आधार पर ही अतिरिक्त पैसे निकाल सकते हैं.

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