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चिता आंदोलन के 12वें दिन 'सूली सत्याग्रह' शुरू:प्रदर्शनकारी बोले- केन-बेतवा समेत कई परियोजनाओं के विस्थापितों को पुनर्वास नहीं मिला
पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रुंझ और सिंगरौली-ललितपुर रेल लाइन जैसी योजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों का प्रदर्शन अब और उग्र हो गया है। न्याय और उचित मुआवजे की मांग को लेकर जारी आंदोलन के 12वें दिन बुधवार को प्रभावितों ने 'सूली सत्याग्रह' शुरू कर दिया। इससे पहले वे चिता, मिट्टी, फांसी और जल सत्याग्रह के जरिए भी अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। लगातार अनदेखी से नाराज आंदोलनकारियों का गुस्सा अब स्थानीय प्रशासन से बढ़कर सीधे सरकार पर फूट पड़ा है। धरना स्थल पर "मोदी-मोहन होश में आओ" और "बिना मुआवजा दिए गांव डुबोना बंद करो" जैसे नारे लग रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि 15 सालों से परियोजनाएं अटकी हैं और गांव डूबने की कगार पर हैं, लेकिन प्रभावितों को अब तक पुनर्वास नहीं मिला है। आर-पार की लड़ाई के मूड में विस्थापित अमित भटनागर ने प्रशासनिक नोटिस और दबाव को 'लोकतंत्र का दमन' बताते हुए कहा कि कानून विस्थापितों के अधिकार और पुनर्वास की गारंटी देता है, जिसे लागू करना सरकार का फर्ज है। विस्थापन का यह मुद्दा अब प्रदेश स्तर पर चर्चा में आ गया है। वहीं ग्रामीणों ने भी साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें पारदर्शी पुनर्वास, सही मुआवजा और न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।
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