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चुनाव से पहले बूथ पर पहुंच रहे नेता:अलीगढ़ में बूथ स्तर पर समस्याएं खोज रही भाजपा, जिले में भागदौड़ शुरू
विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा ने अब बूथ स्तर तक की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी अब इस दौर में यह जानने में जुटी है कि निचले स्तर पर आम आदमी किन समस्याओं से जूझ रहा है। क्या ऐसे मुद्दे रहे, जिन्हें पार्टी के जनप्रतिनिधि अब तक नजरंदाज करते आए और आम लोगों के बीच वे मुद्दे गुस्से का कारण बन रहे हैं। इसी क्रम में भाजपा के प्रांत स्तर के नेता बूथ स्तर पर पहुंच रहे हैं। आईटी सेल ने कॉल सेंटर से लोगों को फोन कॉल पर जानकारी लेना शुरू कर दिया है और खुद पार्टी स्तर से सर्वे टीमों के सहारे फीडबैक जुटाया जा रहा है। दो दिन से डेरा डाले हैं प्रदेश प्रवक्ता पार्टी ने अलग अलग जिलों में ये फीडबैक लेने के लिए प्रदेश स्तर के नेताओं को भेजना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी के नए नवेले प्रदेश प्रवक्ता व मंत्री यतेंद्र शर्मा दो दिन से शहर में डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं के घर पहुंचकर स्वागत स्वीकारा। वहीं अलग अलग मंडलों में आधा दर्जन बूथ अध्यक्षों के घरों पर पहुंचकर वहां स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस दौरान बातचीत में उन्होंने यही जानने का प्रयास किया कि उनके इलाके में क्या ऐसी समस्याएं हैं, जिनका पिछले पांच वर्ष या नौ वर्ष समाधान नहीं हुआ। स्थानीय स्तर से बूथ अध्यक्ष से लेकर अन्य नेताओं के सहारे मुद्दा जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाया गया। मगर इस पर किसी का ध्यान नहीं गया। सामूहिक इस समस्या के चलते कितनी आबादी प्रभावित होती है। कौन सा विभाग है, जो इस समस्या के लिए जिम्मेदार है। उसके अधिकारियों ने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया है। इस दौरान उन्होंने बूथ अध्यक्ष के आवास पर समस्याएं सुनते हुए उनके समाधान का भरोसा दिलाया। इसके अलावा शहर में वर्ग वार भी लोगों से मुलाकात कर समस्याएं जानने का प्रयास किया है। सर्वे टीमें और कॉल सेंटर के सहारे भी जुटाया जा रहा फीडबैक इसी तरह प्रदेश व केंद्र स्तर से तीन-तीन सर्वे टीमें भी जिले में अलग अलग घूम रही हैं। वहीं भाजपा आईटी सेल के कॉल सेंटर से लोगों पर कॉल पहुंच रहे हैं। यह सर्वे टीम व कॉल सेंटर से आ रही कॉल के जरिये यह जानने का प्रयास हो रहा है क समस्या क्या थी या है। उसके विषय में लोगों ने कहां तक जानकारी दी। इसके बाद उसके समाधान पर क्या व किस स्तर से प्रयास हुए । अगर नहीं तो क्यों प्रयास नहीं हुए और किस स्तर से लापरवाही बरती गई है। यह पूरा फीडबैक संगठन स्तर को दिया जा रहा है। ताकि नाराजगी की जा सके दूर इस फीडबैक लेने के पीछे संगठन व सत्ता के लोगों की मंशा है कि अभी से फीडबैक लेकर वे नाराज लोगों को समझाकर मना कर सकें या शांत कर सकें। कहीं समस्या का तत्काल समाधान होना संभव है तो उसे कराया जाए और कहीं तत्काल समाधान संभव नहीं है तो वहां लोगों को कैसे मनाकर समझाया जाए। इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
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