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'बिना पूछे कैसे शामिल कर ली जमीन':पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड टाउनशिप पर जमीन मालिक नाराज, कहा- हमारी सहमति लेनी चाहिए थी
बिहार सरकार की ‘पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना 2047’ को लेकर शनिवार को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में हितधारक परामर्श बैठक हुई। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसमें जमीन मालिकों ने विरोध जताया। आरोप था कि टाउनशिप के लिए हमारी जमीन शामिल करने की चर्चा तो हो रही है, लेकिन योजना तैयार करने से पहले हमलोगों से बातचीत नहीं की गई। बैठक में जमीन मालिकों ने योजना में उनकी भूमिका, जमीन से जुड़े प्रावधान और भविष्य में होने वाले विकास को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े स्तर की योजना बनाने से पहले स्थानीय किसानों और जमीन मालिकों की सहमति-सुझाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सरकार ने मांगे सुझाव और आपत्तियां नगर विकास एवं आवास विभाग ने टाउनशिप की प्रारूप योजना को आम लोगों से सुझाव-आपत्तियां लेने के लिए प्रकाशित किया है। बैठक में प्रस्तावित विकास मॉडल पर प्रस्तुतीकरण दिया गया और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों पर चर्चा की गई। 9 प्रखंडों के 273 गांव होंगे शामिल प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड टाउनशिप का दायरा करीब 81,730 एकड़ में फैला होगा। योजना में पटना जिले के पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी प्रखंड के 273 गांव शामिल किए गए हैं। इसके अलावा नौबतपुर नगर पंचायत का आंशिक और पुनपुन नगर पंचायत का पूरा क्षेत्र भी प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल है। टाउनशिप का करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित है, जिसमें पुनपुन प्रखंड के 19 गांव शामिल होंगे। व्यवस्थित शहर के रूप में विकास सरकार की योजना के अनुसार टाउनशिप को केवल नए मकानों और सड़कों का क्षेत्र बनाने के बजाय एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसमें आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, सड़क, सार्वजनिक परिवहन, पार्क, जलापूर्ति, सीवरेज और जल निकासी जैसी सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की परिकल्पना है। योजना में भूमि पूलिंग, भूमि पुनर्संयोजन या लागू कानून के तहत अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से भू-स्वामियों को विकास प्रक्रिया में सहभागी बनाने की बात कही गई है। छोटे किसानों और प्रस्तावित टाउनशिप में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) को बढ़ावा देने की योजना है। सार्वजनिक परिवहन के साथ पैदल और साइकिल के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा पार्क, हरित गलियारे, खेल क्षेत्र और जल निकायों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा। सरकार, विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि रहे मौजूद बैठक में विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी, पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। CREDAI बिहार, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, बैंकिंग क्षेत्र, ITPI, IIA और IEI के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। निवेश-रोजगार बढ़ाने की उम्मीद सरकार का मानना है कि पाटलिपुत्र टाउनशिप पटना के बढ़ते शहरी दबाव को कम करने में मदद करेगी। विकास से नए आवास, रोजगार, कारोबार और निवेश के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। विभाग का कहना है कि प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के आधार पर योजना को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, जमीन मालिकों के विरोध ने यह साफ कर दिया है कि इतने बड़े भू-क्षेत्र में प्रस्तावित टाउनशिप को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को स्थानीय भू-स्वामियों और समुदायों के साथ संवाद और उनकी चिंताओं का समाधान करना अहम होगा।
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