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भारत की नवरत्न कंपनी से जुड़ेंगे छोटे उद्योग:झांसी में शुरू हुई वेंडर डेवलपमेंट मीट, छोटे कारोबारियों से करनी होगी 25 फीसदी खरीद
बुंदेलखंड के छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़े सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जोड़ने के लिए झांसी में बुधवार से दो दिवसीय वेंडर डेवलपमेंट कार्यक्रम की शुरुआत मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने की। एमएसएमई विकास कार्यालय, कानपुर की ओर से बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में एचएएल कानपुर, एलिम्को कानपुर, बीएचईएल, एनटीपीसी, एनसीआर, सिडबी समेत कई संस्थानों और एमएसएमई इकाइयों ने 15 से अधिक स्टॉल लगाए। यहां उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया गया। पहले 2 तस्वीर देखिए... कार्यक्रम में अधिकारियों ने उद्यमियों को सरकारी खरीद नीति, वेंडर रजिस्ट्रेशन, जेम पंजीकरण, बैंक ऋण और निर्यात के अवसरों की जानकारी दी। इसका उद्देश्य स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को बड़े खरीदारों से जोड़ना और उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना है। 25 फीसदी खरीद एमएसएमई से करनी होगी एमएसएमई विकास कार्यालय, कानपुर के निदेशक विष्णु कुमार वर्मा ने बताया कि सार्वजनिक खरीद नीति के तहत सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपनी कुल खरीद का 25 प्रतिशत सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से करना आवश्यक है। इसमें अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग की इकाइयों के लिए 4 प्रतिशत और महिला उद्यमियों की इकाइयों के लिए 3 प्रतिशत खरीद का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को बड़े संस्थानों के साथ कारोबार करने का मौका मिलेगा। कृषि के बाद एमएसएमई में सबसे ज्यादा रोजगार की संभावना मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने कहा कि कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार की संभावनाएं एमएसएमई क्षेत्र में हैं। उन्होंने वोकल फॉर लोकल पर जोर देते हुए स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बुंदेलखंड के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और हाईटेक तकनीक से जुड़े क्षेत्रों को भी विकसित किया जाएगा। मंडलायुक्त ने बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति का भी जिक्र किया। उनके अनुसार बुंदेलखंड में 275 मेगावाट, झांसी में 250 मेगावाट और ललितपुर में 200 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। झांसी को औद्योगिक हब बनाने का रोडमैप तैयार जिलाधिकारी गौरांग राठी ने कहा कि एमएसएमई विकास कार्यालय की ओर से आयोजित ऐसे कार्यक्रमों से वेंडर और बाजार के बीच का अंतर कम हुआ है। झांसी को औद्योगिक हब बनाने के लिए रोडमैप तैयार किया जा चुका है। बुंदेलखंड को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना सरकार का लक्ष्य है। बीडा के एडिशनल सीईओ प्रवीण वर्मा ने बताया कि झांसी के पास नया औद्योगिक शहर विकसित किया जाएगा। इसके लिए 28 हजार एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है और पर्यावरण विभाग से मंजूरी भी मिल गई है। प्रस्तावित शहर में 32 से 33 प्रतिशत क्षेत्र उद्योगों के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि 25 से 30 प्रतिशत क्षेत्र में ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इससे करीब 6 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। डिफेंस कॉरिडोर और हाउसिंग प्रोजेक्ट से भी बढ़ेगा उद्योग जेडीए उपाध्यक्ष हिमांशु गौतम ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में झांसी विकास प्राधिकरण भी सहयोग कर रहा है। 1200 एकड़ में हाउसिंग प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इससे बुंदेलखंड के उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और एमएसएमई क्षेत्र को भी लाभ होगा। उत्तर रेलवे के उप मुख्य सामग्री प्रबंधक बीआर मीणा ने वेंडर पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी दी। संयुक्त आयुक्त उद्योग सुधांशु तिवारी ने प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया। एलिम्को कानपुर के प्रबंधक संजय जायसवाल ने उद्यमियों से कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर बड़े संस्थानों को आपूर्ति करने की अपील की। 3 सितंबर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन और तकनीकी सत्रों की विशेष कार्यशाला आयोजित होगी। इसमें उद्यमियों को बड़े संस्थानों में वेंडर बनने और कारोबार के अवसरों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष धीरज खुल्लर ने की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बुंदेलखंड के उद्यमियों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को मजबूत करेगा।
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