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भिंड में नहीं हुई एक भी फ्री रजिस्ट्री:बैतूल के पंचायत भवन में ताले; MP में पटवारियों की हड़ताल से कई जिलों में काम अटका
मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत करीब 50 लाख लोगों को जमीन-मकान की फ्री रजिस्ट्री देने के अभियान की शुरुआत हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इंदौर में हितग्राहियों को रजिस्ट्रियां बांटकर अभियान शुरू किया। हालांकि पटवारियों की हड़ताल का असर कई जिलों में दिखाई दिया। भिंड में गुरुवार को एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी। नर्मदापुरम में प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन सर्वर और डाटा फेचिंग की समस्या से काम धीमा रहा। मंदसौर में भी पटवारी काम पर नहीं पहुंचे। दैनिक भास्कर ने एमपी के जिलों के हाल जाने। पढ़िए रिपोर्ट... पहले समझिए, स्वामित्व योजना क्या है गांवों में कई परिवार पीढ़ियों से अपने घर और आसपास की आबादी भूमि पर रह रहे हैं। उनके पास संपत्ति के मालिकाना हक का औपचारिक रिकॉर्ड नहीं होता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में स्वामित्व योजना शुरू की। इसके तहत ड्रोन से गांवों की आबादी भूमि का सर्वे किया जाता है। इसके बाद पात्र लोगों को अधिकार अभिलेख यानी प्रॉपर्टी कार्ड दिया जाता है। मध्यप्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख मंजूर किए जा चुके हैं। इनमें 48.32 लाख रिकॉर्ड निजी संपत्तियों से जुड़े हैं। हालांकि प्रॉपर्टी कार्ड और रजिस्ट्री अलग-अलग दस्तावेज हैं। प्रॉपर्टी कार्ड में सर्वे के आधार पर संपत्ति पर अधिकार दर्ज होता है। रजिस्ट्री संपत्ति का पंजीकृत कानूनी दस्तावेज होती है। अब डिटेल में जानिए पूरी स्थिति 1. भिंड में पटवारियों के विरोध से नहीं हुई एक भी रजिस्ट्री भिंड जिले में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी के भूखंडों की रजिस्ट्री का काम शुरू नहीं हो सका। गुरुवार से प्रक्रिया शुरू होनी थी। इसके बावजूद जिले के किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई। योजना के नोडल अधिकारी एवं एडीएम राजन बी. नाडिया ने इसकी पुष्टि की है। उनके मुताबिक रजिस्ट्री नहीं होने के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है। 1.29 लाख भूखंडों की रजिस्ट्री प्रस्तावित भिंड में स्वामित्व योजना के तहत 1 लाख 29 हजार 64 भूखंडों की रजिस्ट्री प्रस्तावित है। इनके लिए करीब 450 पटवारियों को जिम्मेदारी दी गई थी। पटवारियों के विरोध के कारण गुरुवार को प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। पटवारी संघ को रजिस्ट्री के दस्तावेज में पटवारी का नाम दर्ज किए जाने पर आपत्ति है। पटवारियों का कहना है कि भविष्य में इन भूखंडों को लेकर विवाद होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। 2. मंदसौर में भी पटवारी काम पर नहीं पहुंचे मंदसौर जिले में भी अभियान के पहले दिन पटवारियों की हड़ताल का असर रहा। मध्यप्रदेश पटवारी संघ की जिला अध्यक्ष के मुताबिक जिले में पटवारी काम पर नहीं पहुंचे। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों से रजिस्ट्री को लेकर फिलहाल कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पटवारियों के काम पर नहीं आने से प्रक्रिया प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। 3. नर्मदापुरम में प्रक्रिया शुरू, एक रजिस्ट्री हुई नर्मदापुरम जिले की नीमसाडिया ग्राम पंचायत में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन अभियान के तहत गुरुवार को शिविर लगाया गया। यहां रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हुई। सुबह से दोपहर तक 14 आवेदन आए। इनमें एक रजिस्ट्री भी हुई। हालांकि सॉफ्टवेयर पर यह ऑनलाइन दिखाई नहीं दे रही थी। पटवारी नवीन कुमार के मुताबिक सर्वर डाउन होने और डाटा फेचिंग में परेशानी के कारण काम धीमी गति से चल रहा है। 1183 भूमि स्वामी, 774 की ही ई-केवाईसी नीमसाडिया में कुल 1183 भूमि स्वामी दर्ज हैं। इनमें 860 निजी पट्टे और 224 शासकीय पट्टे हैं। अब तक 774 भूमि स्वामियों की ई-केवाईसी पूरी हुई है। वहीं 314 भूमि स्वामियों के आधार और समग्र डेटा का मिलान हो चुका है। प्रशासन का प्रयास है कि पात्र हितग्राहियों की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें स्वामित्व अधिकार से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। 4. बैतूल में पटवारियों की हड़ताल से पहले दिन ही अटका काम बैतूल में ग्रामीण आबादी की जमीन की मुफ्त रजिस्ट्री योजना पहले ही दिन पटवारियों की हड़ताल से प्रभावित रही। शासन ने 17 सितंबर से जिले की 556 ग्राम पंचायतों में पहले चरण के शिविर लगाने की तैयारी की थी। गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को इसकी जानकारी भी दी गई थी। गुरुवार को कई पंचायत भवनों में कर्मचारी नहीं पहुंचे। कुछ जगह ताले लगे मिले। इसके कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। शिविरों में पहुंचे ग्रामीण भी प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करते रहे। जिले में करीब 1 लाख 54 हजार स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के पंजीयन का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण के शिविर 17 से 19 सितंबर तक, दूसरे चरण के 24 से 26 सितंबर और तीसरे चरण के 1 से 3 अक्टूबर तक लगाए जाने हैं। पटवारी संघ को रजिस्ट्री में जिम्मेदारी पर आपत्ति पटवारी संघ ने योजना में रजिस्ट्री के काम में निष्पादक की भूमिका से अलग करने की मांग की है। संघ के जिलाध्यक्ष मोहनलाल धुर्वे का कहना है कि भविष्य में जमीन को लेकर कानूनी विवाद होने पर पटवारियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसी वजह से संघ ने यह भूमिका नहीं निभाने का फैसला किया है। ग्रामीणों की अलग परेशानी, कई परिवारों का सर्वे ही नहीं ग्रामीणों का कहना है कि योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिल रहा है, जिनकी जमीन का ड्रोन सर्वे और रिकॉर्ड तैयार हो चुका है। कई परिवार ऐसे भी हैं, जो 20-30 साल से आबादी भूमि पर रह रहे हैं। उनका अब तक सर्वे नहीं हुआ है। बडोरा निवासी दिनेश मालवीय ने बताया कि जमीन का पट्टा और रजिस्ट्री नहीं होने से उसके आधार पर लोन भी नहीं मिल पाता। उन्हें अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस जमीन की रजिस्ट्री होनी है। ऐसे में पहले सर्वे और रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। यह खबर पढ़िए... MP में पहली फ्री रजिस्ट्री बड़ौद के सीताराम को मिली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को इंदौर में स्वामित्व अधिकार योजना में फ्री रजिस्ट्री बांटने के अभियान की शुरुआत की। प्रदेशभर में सबसे पहले आगर-मालवा के बड़ौद निवासी सीताराम को रजिस्ट्री दी गई। इसके बाद रायसेन के माखन सिंह गुर्जर को ये मालिकाना हक मिला। पूरी खबर पढ़ें...
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