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अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा 27 सितंबर से करेगा आंदोलन:विभाग परीक्षा लेने की तैयारी में, शिक्षक संगठन आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) कराने की तैयारी में जुटा है। वहीं, शिक्षक संगठन परीक्षा का विरोध करते हुए आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे हैं। शिक्षकों का संयुक्त मोर्चा 20 सितंबर को भोपाल में बैठक करेगा। इसमें 27 सितंबर से धरना आंदोलन शुरू करने की रणनीति पर चर्चा होगी। फिलहाल जिला स्तर पर आंदोलन को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। राज्य स्तर पर फैसला होने के बाद जिलों में आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। राज्य अध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष एवं शिक्षकों के संयुक्त मोर्चा के संयोजक जगदीश यादव ने कहा कि 16 सितंबर को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से राज्य सरकारों को पत्र जारी किया गया है। इससे पता चलता है कि 30 अगस्त को दिल्ली में किया गया आंदोलन प्रभावी रहा है। मध्यप्रदेश में लगातार हुई चर्चाओं के बाद सरकार ने परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया है। यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का शिक्षक किसी भी कीमत पर TET नहीं देना चाहता। यह सिर्फ परीक्षा पास करने का मामला नहीं, बल्कि शिक्षक के गौरव से जुड़ा विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक दिन की परीक्षा से शिक्षा की गुणवत्ता तय हो सकती है? शिक्षकों के लिए हर साल प्रशिक्षण का समय निर्धारित होना चाहिए और प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जाना चाहिए। 27 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरने की रणनीति पर होगी चर्चा यादव ने कहा कि संयुक्त मोर्चा के घटक दलों की 20 सितंबर को भोपाल में बैठक होगी। दिल्ली में आंदोलन के बाद पदाधिकारियों के साथ होने वाली इस बैठक में 27 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना देने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार RTE Act लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों की पात्रता परीक्षा लेने का निर्णय नहीं बदलती, तब तक आंदोलन स्थगित नहीं किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से शिक्षकों के साथ मिलकर सकारात्मक समाधान निकालने का आग्रह किया। संयुक्त लड़ाई से ही जीतेंगे यादव ने कहा कि सभी के सहयोग से तीन दशक से शिक्षकों की लड़ाई चल रही है। कुछ लोग आंदोलन को लेकर नकारात्मक बातें कर रहे हैं और यह कहते हैं कि इससे यह नहीं मिला या वह नहीं मिला। उन्होंने कहा कि संयुक्त लड़ाई के पक्षधर हैं। शिक्षकों की स्थिति में पिछले तीन दशकों में जो बदलाव आया है, वह सामूहिक संघर्ष का परिणाम है। ‘ज्यादा नेतागिरी से विधायक-सांसद बनने का भ्रम न रखें’ राज्य अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष यादव ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि कुछ लोग छठवां और सातवां वेतनमान दिलाने का श्रेय लेने का दावा करते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें किसी एक व्यक्ति का योगदान नहीं है, बल्कि सभी का योगदान रहा है। अध्यापक संवर्ग का गठन भी सभी के संयुक्त संघर्ष के बाद 2018 में हुआ था। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी अलग नेतागिरी और संगठन खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षकों की नेतागिरी के जरिए विधायक या सांसद बन जाने की सोच भ्रम है। यादव ने स्पष्ट किया कि जिलों में अभी आंदोलन को लेकर कोई आयोजन तय नहीं किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग पर गुमराह करने का आरोप दूसरी ओर, शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश दुबे ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग पर शिक्षकों को गुमराह करने का आरोप लगाया। दुबे ने कहा कि राज्य शासन और लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय की ओर से जिन शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा देने की बात कही जा रही है, वह गलत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2018 के शिक्षा संवर्ग को भी परीक्षा में शामिल करने की बात कही थी, जिसका विरोध किया गया। उनका कहना है कि पंचायत सेवा संवर्ग में करीब 20 साल की सेवा के बाद राज्य शिक्षा सेवा में आए शिक्षकों के सामने परीक्षा देने पर फिर से वरिष्ठता प्रभावित होने की स्थिति बन रही है। दुबे ने कहा कि लोक शिक्षण संचालनालय ने अपने आदेश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों का अलग-अलग वर्गीकरण किया है। उनका आरोप है कि विभाग इस मामले में शिक्षकों को गुमराह कर रहा है।
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