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अकृति NSA केस में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:नोएडा DM को प्रक्रिया से अलग नहीं कर सकते, फैसला सुरक्षित रखा
अकृति चौधरी की NSA हिरासत के मामले में गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि जब हिरासत का फैसला कई स्तरों से होकर जिलाधिकारी तक पहुंचा था, तो डीएम को पूरी प्रक्रिया से अलग करके नहीं देखा जा सकता। जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें अकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करते हुए 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। फैसला अकेले नहीं लिया डीएम मेधा रूपम की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि NSA के तहत हिरासत का आदेश डीएम ने किसी एक रिपोर्ट के आधार पर सीधे नहीं लिया था। उन्होंने बताया कि डीएम के सामने मामला पहुंचने से पहले करीब पांच स्तरों पर प्रक्रिया पूरी हुई थी। उनके मुताबिक, इन वैधानिक प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों के बाद डीएम की भूमिका उपलब्ध सामग्री के आधार पर अपनी राय बनाने की थी। UP सरकार ने बताई रिपोर्ट की पूरी प्रक्रिया उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि डीएम तक पहुंची रिपोर्ट कई अधिकारियों के स्तर से होकर आई थी। उनके मुताबिक, रिपोर्ट पहले SHO, फिर DCP और कमिश्नर स्तर से होते हुए जिलाधिकारी तक पहुंची। उन्होंने यह भी बताया कि NSA एडवाइजरी बोर्ड ने भी हिरासत के मामले की जांच की थी। हाईकोर्ट ने रद्द की थी NSA हिरासत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को अकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था और इसकी वसूली डीएम समेत संबंधित अधिकारियों के वेतन से करने को कहा था। अकृति को अप्रैल 2026 में नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। बाद में मई में उस पर NSA लगाया गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीएम मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान ऑनलाइन ऑडियो भी बंद रहा सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने के बाद ऑनलाइन कार्यवाही का ऑडियो बंद हो गया था। इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। मामले में अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है।
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