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अंगूठा लगवाया, राशन अब तक नहीं मिला:शिवपुरी में ग्रामीणों 4 घंटे तक लगाया चक्काजाम, स्कूल वैन, एंबुलेंस फंसी रहीं; तहसीलदार के आश्वासन पर हटे
शिवपुरी जिले के पिछोर-खोड़-शिवपुरी मार्ग पर शनिवार को ग्राम पंचायत बरैला के 300 से अधिक ग्रामीणों ने धाय महादेव चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें तीन महीने से शासकीय उचित मूल्य की दुकान से राशन नहीं मिला है। करीब चार घंटे तक चले चक्काजाम से मार्ग पर आने-जाने वाले वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी हुई। अंगूठा लगवाया, राशन अब तक नहीं मिला ग्रामीणों के अनुसार, बरैला की शासकीय उचित मूल्य की दुकान के सेल्समैन दयाशंकर लोधी ने तीन महीने से राशन का वितरण नहीं किया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले महीने उनसे अंगूठा लगवाया गया था और बाद में राशन देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद अब तक राशन नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली है कि सेल्समैन दुकान में चोरी होने की बात कह रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि दुकान में कोई चोरी नहीं हुई है। राशन दुकान तीन किलोमीटर दूर ग्रामीणों ने बताया कि उचित मूल्य की दुकान पंचायत बरैला से करीब तीन किलोमीटर दूर मजरा धाय महादेव में संचालित होती है। इससे उन्हें राशन लेने में परेशानी होती है। राशन वितरण की समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक, एसडीएम और खाद्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत किए जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही। तीन मांगों को लेकर अड़े ग्रामीण चक्काजाम के दौरान ग्रामीणों ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें तीन महीने का पूरा राशन तत्काल दिलाना, सेल्समैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हटाना और राशन दुकान को ग्राम पंचायत बरैला में स्थानांतरित करना शामिल है। इस दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी भी की। तहसीलदार ने समझाकर खुलवाया जाम सूचना मिलने पर तहसीलदार शिवशंकर गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और जाम खुलवाया। इसके बाद राशन दिलाने की व्यवस्था शुरू कराई गई। तहसीलदार ने बताया कि खाद्य निरीक्षक को भी मौके पर व्यवस्था के लिए छोड़ा गया था। ग्रामीण पूरे तीन महीने का राशन देने की मांग पर अड़े रहे। तहसीलदार के अनुसार, जाम खुलवा दिया गया था और ग्रामीणों को कुछ राशन भी दिलाया जा रहा था, लेकिन वे पूरा राशन देने की मांग पर कायम थे। दुकान में चोरी हुई है या नहीं और इस मामले की वास्तविक स्थिति क्या है, इसकी जानकारी खाद्य निरीक्षक की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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