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'आरक्षण समाप्त करने के पक्ष में नहीं':सहरसा में आनंद मोहन बोले-'व्यवस्था की समीक्षा जरूरी',दबे-कुचलों को मिले हक

📰 Bhaskar 🕐 1 min read 📅 August 28, 2026 👁 2 views
'आरक्षण समाप्त करने के पक्ष में नहीं':सहरसा में आनंद मोहन बोले-'व्यवस्था की समीक्षा जरूरी',दबे-कुचलों को मिले हक
सहरसा में शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने गंगजला स्थित अपने आवास पर एक प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि वह आरक्षण समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन इसकी व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने यूजीसी और आरक्षण के मुद्दे को गंभीर बताया। आनंद मोहन ने आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों से देश की सामाजिक परिस्थितियों को समझने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आरक्षण समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि इसकी व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) को दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण को भी इसी संदर्भ में देखने की बात कही। पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने को आरक्षण उन्होंने बताया कि संविधान सभा में सामाजिक समरसता और देश के सर्वांगीण विकास के लिए 'विशेष अवसर का सिद्धांत' स्वीकार किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सदियों से सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना था। पूर्व सांसद ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें आरक्षण को प्रारंभिक तौर पर सीमित अवधि के लिए रखने की बात कही गई थी। ओबीसी में 1 हजार से अधिक जातियां, लाभ कुछ को पूर्व सांसद ने दावा किया कि आजादी के दशकों बाद भी आरक्षण का लाभ समाज के सभी वंचित वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने कहा कि ओबीसी में एक हजार से अधिक जातियां हैं, लेकिन आरक्षण का बड़ा हिस्सा कुछ ही जातियों तक सीमित रह गया है। समीक्षा कर व्यवस्था को न्यायपूर्ण बनाया जाना चाहिए आनंद मोहन ने जोर दिया कि आरक्षण समाप्त करने के बजाय, इसकी समीक्षा कर व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे वास्तविक रूप से दबे-कुचले लोगों को उनका हक मिल सकेगा। उन्होंने संविधान के संचालनकर्ताओं से समय-समय पर आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने का आह्वान किया। रक्षाबंधन के मौके पर कई महिलाओं ने आनंद मोहन की कलाई पर राखी बांधी। उन्होंने सभी भाइयों और बहनों को पर्व की शुभकामनाएं दीं और कहा कि जिन महिलाओं ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा है, उनकी सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी भी समाज की है। इसके अलावा पूर्व सांसद आनंद बने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार की महिलाओं को 33 आरक्षण देकर घर के दिल्ली से बाहर निकलने का मौका दिया। आज हमारी बहन है देश से लेकर हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ी है
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